माण्डी

 माण्डी

मुजफ्फरनगर (उ0 प्र0) से लगभग 15 किलोमीटर दक्षिण में स्थित यह गाँव हड़प्पा सभ्यता का नवीनतम स्थल ज्ञात हुआ है जिसका प्रकाशन विभिन्न समाचार पत्रों एवं संचार माध्यमों द्वारा किया गया। 

यहाँ एक खेत से जुताई के दौरान भारी मात्रा में सोने के छल्ले, मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े तथा ईंटे प्राप्त हुई हैं। 

तीन अलग-अलग आकार-प्रकार के सोने के छल्ले मिलने से ऐसा अनुमान किया जाता है कि इनका प्रयोग मुद्रा के रूप में भी किया जाता था तथा इस स्थल पर कोई टकसाल गृह (Mint-House) रहा होगा। 

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की महानिदेशक कोमल आनन्द के अनुसार पहली बार किसी एक स्थल से इतनी अधिक मात्रा में स्वर्ण सिक्के मिले हैं। 

इससे हड़प्पा सभ्यता के कई नवीन पक्षों की जानकारी मिलेगी। 

यहाँ से प्राप्त मृद्भाण्ड हड़प्पा मृद्भाण्डों के ही समान है। 

पुरातत्व विभाग के एक अन्य अधिकारी धर्मवीर शर्मा ने बताया है कि जिस प्रकार के मिट्टी के वर्तन तथा स्वर्ण छल्ले माण्डी से मिलते हैं, उसी वर्तन या छल्लों का उपयोग हड़प्पा के लोग भी किया करते थे। 

इस स्थल की व्यापक पैमाने पर यदि खुदाई की जाय, तो निःसन्देह भारत की प्राचीनतम सभ्यता की नवीन नगरीय बस्ती का पता चलेगा।'

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