प्राचीन भारतीय इतिहास का परिचय

प्राचीन भारतीय इतिहास

( Ancient Indian History):-

इतिहास अतीत में किये गए मानव प्रयास की इतिहास के आवश्यक अंग हैं-

  • अतीत
  • सभ्य युग
  • मानव प्रयास 
  • घटनाओं का आनुक्रमिक प्रसार 

'वर्तमान' जो अभी जीवित है, इतिहास का विषय नहीं है। यद्यपि वह शीघ्र अतीत होकर उसका अंग हो जाएगा।

जब हम ऐतिहासिक क्रम में घटनाओं का वर्णन करते हैं तब उन्हें काल-प्रसार में वितरित करते हैं और जब भौगोलिक क्रम से इनका उल्लेख करते हैं तब उन्हें स्थानानुसार रखते हैं।

इतिहास और भूगोल दोनों कारण और परिणाम के साथ घटनाओं की तिथि और स्थान को व्यवस्था प्रदान करते हैं।

अतः निरन्तरता व परिवर्तनीयता का समसामयिक विश्लेषण ही इतिहास है।

इतिहास हमारी और हमारे समाज की दशा व दिशा का निर्धारण करता है और भविष्य को सुरक्षित बनाने का प्रयास करता है।

प्राचीन भारत का इतिहास मानव सभ्यता के उस समय का इतिहास है, जब वह अपने निर्माण की अवस्था में था।

विशाल पर्वतमालाओं और नदियों की भूमिका प्राचीन भारत के इतिहास के निर्माण में बहुत महत्त्वपूर्ण रही है।

वर्तमान मानव का स्वरूप क्रमिक विकास का परिणाम है।

इतिहासकारों ने अध्ययन हेतु सरलता की दृष्टि से इतिहास को कई भागों में वर्गीकृत किया है।

ऐतिहासिक कालक्रमों का अध्ययन हम ऐतिहासिक सामग्री / स्रोतों के आधार पर करते हैं।

महत्त्वपूर्ण तथ्यों को चुनकर अतीत का पुनर्निर्माण करने को ही इतिहास कहते हैं।

इतिहास के महत्त्वपूर्ण तथ्य हमारे लिये कई रूपों में सुरक्षित हैं जिन्हें हम इतिहास कीसामग्री/स्रोत कहते हैं।

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