वेद:-

वेदों के द्वारा प्राचीन आर्यों के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं राजनीतिक जीवन के बारे में पर्याप्त जानकारी मिलती है। वैदिक युग की सांस्कृतिक दशा के ज्ञान का एकमात्र स्रोत वेद है।

वेदों की संख्या चार है- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद

चारों वेदों को 'संहिता' कहा जाता है।

वेदों को अपौरुष्य कहा जाता है।

 

ऋग्वेद (1500 ई.पू.-1000 ई.पू.):-

  • यह सबसे प्राचीनतम वेद माना जाता है।
  • समस्त आर्य जाती की प्राचीनतम रचना
  • इसकी रचना पंजाब या गंगा यमुना के दोआब में की थी
  • यह एक ऐसा वेद है जो ऋचाओं में  क्रमबद्ध है
  • ऋग्वेद में कुल 10 मंडल, 1028 सूक्त एवं 10,580 ऋचाएँ हैं।
  • इस वेद के पढ़ने वाले ऋषि को 'होतृ' कहते हैं।
  • ऋग्वेद का पहला एवं 10वाँ मंडल सबसे अंत में जोड़ा गया है।
  • ऋग्वेद के तीसरे मंडल में सूर्य देवता 'सविता या सावित्री' को समर्पित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र है।
  • आठवें मंडल की हस्तलिखित ऋचाओं को खिल  कहा जाता है। 
  • 9वें मंडल में देवता सोम का उल्लेख है तथा 10वाँ मंडल चार्तुवर्ण्य या चातुष्वर्ण्य समाज की संकल्पना(चार वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र आदि पुरुष ब्रह्मा के क्रमश: मुख,भुजाओं, जंघाओं व पैरों से उत्पन्न हुवे।)  का आधार है।
  • इसमें इंद्र के लिए 250 व अग्नि के लिए 200 ऋचाओं का वर्णन है। 
  • इसमें वामनावतार का उल्लेख है। 
  • इसमे रावी नदी के तट पर लड़े गए दसराज्ञ युद्ध[पुरू(पुरोहित-वशिष्ठ) तथा भरत(पुरोहित-विश्वामित्र) कबीले के बीच) का उल्लेख मिलता है,जिसमें भरत कबीले का सुदास विजयी हुव था 
  • ऋग्वेद के दो ब्राह्मण ग्रंथ हैं- ऐतरेय एवं कौषितकी अथवा शंखायन।
  • नोट: संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा ‘ऋग्वेद' को विश्व मानव धरोहर साहित्य में शामिल किया गया है।

 

यजुर्वेद:-

  • इसमें यज्ञों के नियमों या विधानों का संकलन मिलता है। यही कारण है कि इसे कर्मकांडीय वेद भी कहा जाता है।
  • यजुर्वेद पद्य एवं गद्य दोनों में है।
  • यजुर्वेद के दो भाग हैं- शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद |
  • शुक्ल यजुर्वेद केवल पद्य में है जबकि कृष्ण यजुर्वेद, गद्य एवं पद्य दोनों में है।
  • यजुर्वेद के मंत्रों का उच्चारण करने वाला पुरोहित 'अध्वर्यु' कहलाता है।
  • यजुर्वेद के प्रमुख उपनिषद - कठोपनिषद, इशोपनिषद, श्वेताश्वरोपनिषद तथा मैत्रायणी उपनिषद हैं।
  • यजुर्वेद का अंतिम अध्याय ईशावास्य उपनिषद जिसका संबंध आध्यात्मिक चिंतन से है।
  • यजुर्वेद के दो ब्राह्मण ग्रंथ हैं- शतपथ एवं तैत्तिरीय।

 

सामवेद:-

  • साम' का अर्थ ‘गान' होता है।
  • इसमें मुख्यतः यज्ञों के अवसर पर गाए जाने वाले मंत्रों का संग्रह है। इसे भारतीय संगीत का जनक कहा जाता है। सात स्वरों (सा, रे, , , , , नि) की उत्पत्ति इसी से हुई।
  • सामवेद में कुल 1875 ऋचाएँ हैं।
  • सामवेद के मंत्रों को गाने वाला 'उद्गाता' कहलाता है। इसमें मुख्यतः सूर्य स्तुति के मंत्र हैं।
  • सामवेद के प्रमुख उपनिषद - छांदोग्य तथा जैमिनीय हैं।
  • सामवेद का ब्राह्मण ग्रंथ - पंचविश ब्राह्मण, षडविश ब्राह्मण है।

 

अथर्ववेद:-

इसकी रचना अथर्वा तथा अंगिरस ऋषि द्वारा सभी ग्रंथों के की गई। इसीलिये इसे 'अथर्वागिरस वेद' भी कहा जाता है।

इसमें 731 सूक्त, 20 अध्याय तथा लगभग 6000 मंत्र हैं।

इसमें ब्रह्म ज्ञान, धर्म, समाजनिष्ठा औषधि प्रयोग, रोग निवारण, जादू-टोना, तंत्र-मंत्र आदि अनेक विषयों का वर्णन है।

अथर्ववेद का एकमात्र ब्राह्मण ग्रंथ 'गोपथ' है।

अथर्ववेद के उपनिषद - मुंडकोपनिषद, प्रश्नोपनिषद तथा मांडूक्योपनिषद

मुंडकोपनिषद से ही भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' लिया गया है।

इसमें सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है।

पृथिवीसूक्त इसका प्रतिनिधि सूक्त मन जाता है

परीक्षित को कुरुओं का राजा बताया है।

इसकी रचना सबसे अंत में हुई  


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